निर्भया : a heart touching poem by Alok Upadhyay

सहमी सी हैं तितलियां सभी,
खौफ में हर परिन्दा है…
नकाब इन्सां का चेहरे पे,
यहांहर शख्स दरिन्दा है…
निर्भया माफ कर देना,
कि हम बहुत शर्मिन्दा है…
बेटीयों घर से निकलना ना,
कि अभी अफरोज जिन्दा है…!!!
by
Alok upadhyay

8 Comments

  1. Manjusha Manjusha 23/12/2015
  2. Er. Anuj Tiwari"Indwar" Er. Anuj Tiwari"Indwar" 24/12/2015
  3. Onika Setia Onika Setia 24/12/2015
  4. Bimla Dhillon 24/12/2015
    • Alok Upadhyay Alok Upadhyay 07/01/2016
  5. Pawan Prajapati 24/12/2015

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