अधूरे किस्से

मेरे शहर के अतीत में
रंगों के मौसम संग
कई किस्से बिखर रहे
मैं यहां अकेला था
सफेद पन्नों के साथ
जिनके अनछुये एहसास
जिंदगी में निखर रहे,
कुछ पुरानी चिट्ठियां
सहेजा था जिन्हें
रोशनी की तलाश में
स्याह फैली थी जो
हृदय की गहराईयों में
कागजों के ऊपर
अंधकार बन उभर रही,
जिंदगी की तलाश में
हवाओं ने
तूफानों का सहारा लिया
पतझड़ों ने भी
बहारों से किनारा किया
भ्रम की गलियों को
बना इतिहास की कहानी
अधूरे किस्से बने
टूटी जंजीरों की निशानी,

….. कमल जोशी…..

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