क्या रख्खा श्रृंगार मे (तेवरी)

तेवरी – अनुज तिवारी “इन्दवार”

जलन भरे जी से जला ,
तन-मन मे कचरा भरा , क्या रख्खा श्रृंगार मे !१!

बात करें जब नूर की ,
रंग गई कोहिनूर की , देने को उपहार मे !२!

चन्दन लगे लिलाट पे ,
पोथी पढते खाट पे , देखा उनको बार मे !३!

4 Comments

  1. RAJ KUMAR GUPTA Raj Kumar Gupta 21/12/2015
    • Er. Anuj Tiwari"Indwar" Er. Anuj Tiwari"Indwar" 21/12/2015
  2. डी. के. निवातिया निवातियाँ डी. के. 22/12/2015
    • Er. Anuj Tiwari"Indwar" Er. Anuj Tiwari"Indwar" 23/12/2015

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