प्रकृति प्रेम

लहलहाते फसल
सिंचता किसान
सरसो की बसंती फूल
कलेवा ले जा रही औरत
और उसके कदमों की
मंथर मंथर चाल
उसकी पायल की रुनझुन से
उत्पन्न हो रहे थे ताल
चहुंधा वृक्षों का समूह
आम की टहनियां
उसके कोंपल व पूष्प
और टहनियों पर बैठीं हुईं
कोयलियों की काकली
शीतल हवाओं का झोंका
स्वच्छ आसमान
मनभाती सूरज की किरणें
जिसकी आलिंगन से
निराली सी होती अनुभूति
और इस अनुभूति से
अंतःकरण से गात तक
विस्तारित होती
प्रकृति प्रेम व पुलकन।

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