आॅगन का फूल

1
एक पूष्प
एक पौद्ये की टहनी पर
मेरे घर की आॅगन में
मेरे गमले में
जिसे हाल ही में कुछ रोज पहले
लगाया था ये आश लेकर मन में
की कल वह प्रफुल्लित होगा
मनभावन सा होगा आॅगन
उसके सौंदर्य के वेग से
व खुशबू की तेज से
होंगे वे आकर्षित जो भी
गुजरेंगे होकर द्वार से
वह भरमायेगा प्रत्येक मन को
बुलाएगा अपनी ओर मौन स्वर देकर

2

मैंने दूर से ही देखा
आकर्षित हो रहा हूॅ
उसके खिलने से आॅगन में
जो दृश्य बन रहा है
उसमें गहराई से खो रहा हूॅ
वह पूकार रहा है मौन स्वर में
अगले ही छण बेकल होकर बढ़ाया कदम
अब पहुॅच गया हूॅ उसके करीब
सहला रहा हूॅ उसकी पंखुडि़याॅ
अपने रुखे रुखे हाथों से
इस भय से अनभिग की
पूष्प की कोमलता को कहीं ठेस न लग जाये।

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