तुम्हारे वास्ते बस प्यार था………गजल-3

तुम तो अदावत को हवा देते रहे बरसों तलक
मेरे दिल तो तुम्हारे वास्ते बस प्यार था ।

तुम ही रफ्ता रफ्ता दूर मुझसे हो गये
मुझको भला कब तेरी सानिध्य से इंकार था ।

गर मैं नासमझ था तो तुम्ही समझा देते
कि वृथा ही मैं तुम्हारे प्यार मे बेजार था ।

दिल निकालकर मैंने तेरे आगे रख दिया
वह तुम्हारे वास्ते एक रोज का अखबार था ।

बस पलट लिए कुछ सफे और जान लिया “राज“
कि ये सच्चा प्यार नही घाटे का व्यापार था ।

राज कुमार गुप्ता – “राज“

4 Comments

  1. Shishir "Madhukar" Shishir 20/12/2015
    • RAJ KUMAR GUPTA Raj Kumar Gupta 21/12/2015
  2. Er. Anuj Tiwari"Indwar" Er. Anuj Tiwari"Indwar" 21/12/2015
    • RAJ KUMAR GUPTA Raj Kumar Gupta 21/12/2015

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