*सज़ा* डॉ. मोबीन ख़ान

इन आँखों में अब नींद कहाँ,
कल के ख़्वाब की हक़ीक़त चाहता हूँ।।

जो गुनेहगार नहीं उनकी रिहाई,
पर गुनहगारों की सज़ा चाहता हूँ।।

2 Comments

  1. asma khan asma khan 20/12/2015
    • Dr. Mobeen Khan Dr. Mobeen Khan 20/12/2015

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