कब्बाली (तेरी दीवानगी की हद )

कब्बाली – तेरी दीवानगी की हद (अनुज तिवारी “इन्दवार”)

एक तरफ बहता है दरिया एक तरफ है गहरी खाई !-५

नहीं मिलती यहाँ राहत ,
यहाँ मसहूर है चाहत ,
नहीं मजबूर ये चाहत ,
हमें मंजूर ये चाहत…….३
चाहत चाहत……
तेरी चाहत की ये लहरें हमे मझधार ले आईं !-३
एक तरफ बहता है दरिया एक तरफ है गहरी खाई ! -५

आया महबूब को लेने
उसे लेकर ही जाऊँगा ,
सितम अब बस भी कर जालिम
नहीं कुछ कर ही जाऊँगा…३
कर जाऊँगा…….
तेरी दीवानगी की हद यूँ सरहद पार ले आई !-३
एक तरफ बहता है दरिया एक तरफ है गहरी खाई !-५

रहमत कर मेरे मौला
मोहलत दे मेरे मौला ,
तेरा बंदा तेरे दर पर
बदल तकदीर दे मौला.-३
मौला मौला…..
तुझे पाने की जिद हमको यहाँ इस पार ले आई ! -३
एक तरफ बहता है दरिया एक तरफ है गहरी खाई ! -५

Leave a Reply