फ्रीलांसिंग में चोरी

पड़ रही थी इंग्लिश लिटरेचर,
सोचा था बनूँगी मैं लेक्चरर,

पर नौकरी की थी मुझे जल्दी,
तो मैंने एम.बी.ए. ही कर ली,

एच.आर. बन कर रही पुरे साल,
फिर बसा लिया अपना घर-संसार,

पति हैं मेरे आई.टी. प्रोफेशनल,
हम दोनों ने लिया डिसीजन रैशनल,

करूँ कुछ दिन घर पर ही रेस्ट,
ट्राई करूँ कोई जॉब होम बेस्ड,

शुरू किया फ्रीलांसिंग का काम,
फोन और नेट का पॉकिट से दिया दाम ,

खुश थी मैं क्लोजर हुए एक पर एक,
रिक्रूटमेंट का काम में फंडिंग थी लेट,

तीन महीने किया काम जोर-शोर से,
पर मेरी सैलरी वो ले गए चोर से,

जब तक है फ्रीलांसिंग में चोरी-चमारी,
घर से कैसे काम करेंगी बीवियाँ बेचारी।

Posted by Tishu Singh

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