जीवन

अम्बर आंगन
घने मेघों के साया
मौसमों की निश्छ्ल तरंग
वर्षा चंद्रलेख भिगोये अंग
सूर्य हुआ मद्धम
पवन ने पत्ते उड़ाये
धरती की मर्म हरीतिमा में
रंग सतरंगी इन्द्रधनुष छाये
जीवन का अर्थ
बहती नदी की धारा
अनेकों पत्थर भावों में
गहराईयों ने फिर संवारा
खोजता अंतर्मन
आधे अधूरे रहस्य
अंतहीन हुई यात्राओं के
हृदयों में छुपी मात्राओं के
सुनहली भोर
रश्मिलोक की छांव में
भूलभुलैया रचा वातावरण
मन की मंद मुस्काई नाव में।

………….. कमल जोशी

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