मंजिल

दोपहर की गरम धूप में
वह चली जा रही
रूकी ना एक क्षण
कदमों की ताल बता रही,
संग सखियां चंचल
अधरों पर भाव अविरल
जीवन पथ पर निरन्तर
वह बढ़ी जा रही,
गम्भीर चेहरा
कोमल आंखे
दुनिया से बेखबर
राह एक खींची जा रही,
मैं तो रब से दुआ करूं
वह कामयाब हो
और उसे
अपनी मंजिल मिल जाये।

……….. कमल जोशी

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