ओंस की बूंद

मेरे जीवन का
आरम्भ तुम ही हो
मेरे जीवन का
अन्त तुम हो
तुम समायी हो
मेरी जिन्दगी में ऐसे
सुबह-सुबह चमके
सूरज की किरणों से
ओंस की बूंद जैसे
और धीरे-धीरे
ओझाल हो जाये आंखों से
उसी तरह
तुम जब मेरे सामने आती हो
छा जाती हैं खुशियां
मेरी जिन्दगी में
जाती हो जब दूर मुझसे
दिल में सिर्फ
तुम्हारी यादें रह जाती हैं।

………… कमल जोशी

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  1. डी. के. निवातिया निवातियाँ डी. के. 17/12/2015

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