“बारिस” डॉ. मोबीन ख़ान

जमीं और आसमाँ दोनों गुमसुम से हैं,
अब इन्हें इंसानियत पर तरस नहीं आती।।

आने को तो ज़लज़ला आ जाता है,
वक़्त-ए-ज़रूरत पर बारिस नहीं आती।।

2 Comments

  1. asma khan asma khan 16/12/2015
    • Dr. Mobeen Khan Dr. Mobeen Khan 16/12/2015

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