तेरा प्यार ही मेरी ज़िंदगी

मै भुलाऊं कैसे बता तुझे
तेरा प्यार ही मेरी जिंदगी

जो मिला न मुझको कभी यहां
है उसी खुदा की बंदगी ।

बरसाते मोहब्बत भी
मुझको न छू सकी
जो दिया है तेरी वफा ने
वो है उम्र भर की तिस्नगी।

अब तो हँसता है मेरा शहर भी
मेरे इस मुकाम पर
तुझे जानकार ऐ जानशीं
मै बना रहा क्यों अजनबी ।

…………….देवेंद्र प्रताप वर्मा”विनीत”

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