इस तरह तुमपे मै अपनी जिंदगी निसार दूंगा।

पत्थरों की दोस्ती मे जिंदगी गुज़ार दूंगा
रंग देके प्यार का एक आशियां संवार दूंगा।

दीवारें क्या बांटेगी दो घरों के जज़्बात
हर ईंट को मोहब्बत से महकता हुआ सिंगार दूंगा।

आँगन मे फूल तो हैं बेशक मेरे हुज़ूर
फिर भी तेरे चमन से मै ख़ुशबुएँ उधार लूँगा।

नाम का नहीं ये एहसास का रिश्ता है
चाहोगे जैसा मुझसे वैसे तुम्हारा साथ दूंगा।

मुश्किलों के नाम से हैरान क्यों होते हैं आप
हर ग़म ए सैलाब से मै खुद को गुज़ार दूंगा।

जिंदगी के बाद भी मुझको करोगे याद तुम
इस तरह तुमपे मै अपनी जिंदगी निसार दूंगा।

…………………………..देवेंद्र प्रताप वर्मा”विनीत”

5 Comments

  1. RAJ KUMAR GUPTA Raj Kumar Gupta 15/12/2015
  2. Shishir "Madhukar" Shishir 15/12/2015
  3. Vijay jamwal from the voice of heart vijay ki klam se 15/12/2015
  4. Rinki Raut Rinki Raut 16/12/2015
  5. सीमा वर्मा सीमा वर्मा 16/12/2015

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