मुठ्ठी भर असमान

जमाने की भीङ में अपना मुकाम बनाना चाहते हैं,
चाह नही पूरा आसमान पाने की,
मुठ्ठी भर आसमान में ही उङना चाहते है………..!

न दौलत चाहते हैं न शोहरत चाहते हैं,
याद करे जमाना मर कर भी हमें,
ऐसी कर गुजरने की तमन्ना चाहते है,
बस उङना चाहते हैं थोङा गिरना चाहते हैं,
कुछ सीखना और कुछ पाना चाहते है……..!

चाह नही है सारा आसमान पाने की,
बस अपने लिए मुठ्ठी भर आसमान चाहते हैं……..!

8 Comments

  1. डी. के. निवातिया निवातियाँ डी. के. 15/12/2015
    • asma khan asma khan 15/12/2015
  2. Shishir "Madhukar" Shishir "Madhukar" 15/12/2015
    • asma khan asma khan 15/12/2015
  3. पंडित राजन कुमार मिश्र Pandit Rajan kumar mishra 15/12/2015
    • asma khan asma khan 15/12/2015
  4. Dr. Mobeen Khan Dr. Mobeen Khan 16/12/2015
    • asma khan asma khan 16/12/2015

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