हाइकू ?एक सोच?डॉ.मोबीन ख़ान

चुप करो भी
खूब हुआ तमाशा
कुछ ना बचा, १

बदले रिश्ते
मर्यादा हुई खत्म
प्रेम ना बचा, २

उल्छी पतंग
उसने काटा डोर
दंड मुझको, ३

घोर अन्देरा
सूरत भी ना दिखे
सहमी आत्मा, ४

2 Comments

  1. डी. के. निवातिया निवातियाँ डी. के. 15/12/2015
    • Dr. Mobeen Khan Dr. Mobeen Khan 15/12/2015

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