हाँथ की लकीरें

लोग कहतें हैं ,कि हमारी किस्मत,
हमारी हाँथ की लकीरों से बदलती है ,
कुछ यह भी कहतें हैं ,
कि हमारी किस्मत ,
हमारे कर्मों से ही है बनती हैं ,
हालांकि दोनों ही बातें,
अपनेआप में विरोधाभासी हैं।

वैसे लकीरें तो बंद मुठ्ठी में ही बनती है ,
किसी ने यह भी कहा है कि ,
बंद मुठ्ठी लाख की और ,
खुल गई तो खाक की ,
मगर हमारी मुठ्ठी तो कब की खुल गई है,
तो क्या हमारी किस्मत खाक की हो गई है?

वैसे लकीरें बनाना तो ,
हमारे बस में नही है ,
तो चलिये जो बस में है ,
वही करतें हैं,
अपने कर्मो से ही ,
अपनी किस्मत बदलतें हैं.

अपने कर्मो से ही ,
अपनी किस्मत बदलतें हैं.

6 Comments

  1. asma khan asma khan 14/12/2015
    • Manjusha Manjusha 14/12/2015
  2. डी. के. निवातिया निवातियाँ डी. के. 14/12/2015
    • Manjusha Manjusha 14/12/2015
  3. Shishir "Madhukar" Shishir 14/12/2015
    • Manjusha Manjusha 21/12/2015

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