दिल की आवाज़ (ग़ज़ल)

ये तन्हाइयां अब मेरे दिल की हमराज है
तुझे पाने की आरज़ू अब पुरानी याद है

गिला भला किस्मत से अब करूँ क्यों मैं
दिल से निकलने वाली आह भी अब फ़रियाद है
तुझे पाने की आरज़ू अब पुरानी याद है

कतरा-कतरा बह चला हूँ गम के दरिया में
लहरों के भंवर से अब साहिल आज़ाद है
तुझे पाने की आरज़ू अब पुरानी याद है

सुना है अब वो भूलने लगे हैं हमें
ख़ुशी है कि, अब तक उन्हें हम याद हैं
तुझे पाने की आरज़ू अब पुरानी याद है

दिल के टूटने की तकलीफ रहेगी अब उम्र भर
उनकी यादों से बिछुड़ने का अभी ये आगाज़ है
तुझे पाने की आरज़ू अब पुरानी याद है

दुनिया चाहे लाख कोशिश कर ले जानने की
नहीं जान सकेगी, सीने में दफ़न जो राज़ है
तुझे पाने की आरज़ू अब पुरानी याद है

उनकी वेवफाइयां भी बहुत सकून देती हैं
क्योंकि वो हमेशा ही इस दिल की सरताज़ हैं
तुझे पाने की आरज़ू अब पुरानी याद है

रहे सदा सलामत ये दुआ की दिल ने बार बार
कभी रहे उनके मेहमान , ये इस दिल की आवाज़ है
तुझे पाने की आरज़ू अब पुरानी याद है

हितेश कुमार शर्मा

4 Comments

  1. डी. के. निवातिया निवातियाँ डी. के. 14/12/2015
  2. Manjusha Manjusha 14/12/2015
  3. Hitesh Kumar Sharma Hitesh Kumar Sharma 15/12/2015
  4. Shishir "Madhukar" Shishir "Madhukar" 15/12/2015

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