बेबस हूँ तड़पता हूँ मैं हज के महीने में SALIM RAZA REWA

नात -ए -रसूल
बेबस हूँ तड़पता हूँ मैं हज के महीने में
सरकार बुला लीजे मुझको भी मदीने में

इस हिन्द की धरती में गुमनाम भटकता हूँ
हुज्जाज कभी होंगे मक्का में मदीने में

भर देंगे मेरा दामन जब चाहे मुरादों से
रहमत की कमी क्या है आक़ा के खजीने में

आफ़ात ज़माने की क्या मुझको सताएंगी
जब नामे नबी हमने लिख रक्खा है सीने में

तैबा का नगर होता,चौखट पे जबीं होती
कुछ लुत्फ़ नहीं आक़ा बिन आप के जीने में

जज़्बात जबां होंगे दीदार की हसरत है
हम गर्म सफ़र होंगे सागर में सफ़ीने में

हो जाए ना बे अदबी भूले से ” रज़ा “कोई
ये बस्ती नबी की है तू रहना करीने में

SALIMRAZA REWA 9981728122

6 Comments

  1. डी. के. निवातिया निवातियाँ डी. के. 14/12/2015
    • SALIM RAZA REWA salimraza 16/12/2015
  2. asma khan asma khan 14/12/2015
    • SALIM RAZA REWA salimraza 16/12/2015
  3. Shishir "Madhukar" Shishir "Madhukar" 15/12/2015
    • SALIM RAZA REWA salimraza 16/12/2015

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