हँस दे तो खिले कलियाँ गुलशन में बहार आए SALIM RAZA REWA

ग़ज़ल
हँस दे तो खिले कलियाँ गुलशन में बहार आए
वो ज़ुल्फ़ जो लहराएँ मौसम में निखार आए

मिल जाए कोई साथी हर ग़म को सुना डालें
बेचैन मेरा दिल है पल भर को क़रार आए

मदहोश हुआ दिल क्यूँ बेचैन है क्यूँ आँखे
हूँ दूर मैख़ाने से फिर क्यूं ए ख़ुमार आए

खिल जाएंगी ये कलियाँ महबूब के आमद से
जिस राह से वो गुज़रे गुलशन में बहार आए

जिन जिन पे इनायत है जिन जिन से मुहब्बत है
उन चाहने वालो में में मेरा भी शुमार आए

फूलों को सजाया है पलकों को बिछाया है
ऐ बादे सबा कह दे अब जाने बहार आए

बुलबुल में चहक तुमसे फूलों में महक तुमसे
रुख़सार पे कलिओं के तुमसे ही निखार आए

SALIMRAZA REWA 9981728122

2 Comments

  1. Shishir "Madhukar" Shishir "Madhukar" 15/12/2015
    • salimraza salimraza 16/12/2015

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