लत : बुरी आदत

दुर्गम दीपं दीर्घ भ्रमण में

सर्वम पर्वम शांत रमण हम

जन्म-जन्मांतर सर्व जनम में

कोण-प्रतिकोण सम-अवयव में

हृत्वाकर्षण द्रुत वेग से

होते चहुँ दोष सुदृढ़ आकर्षित ||

“द्रव्यं द्रव्यं” ह्रदय विदारक बन जाती जब |

वह रट अवसाद परम बहरूप बला अलंकृत ||

ब्रज महाराज परम ब्रह्मं दृष्टिगत

परम धाम ने नाम दाम अभिरूपित |

ब्रह्म ज्ञान को निरे विलय से

लोहित शोणित में करा विसर्जित ||

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