अलविदा कलाम साहब

वो आखिरी छन ,
दृढ़ता विचारो की वही सुगमता ,
संजिन्दग़ी ,सादगी को आखिरी प्रणाम |

साधारणता से महानता का पथ ,
एक सपना ,अदभुत विचारधारा ,
आत्मविश्वास क साथ कदमताल ,
कठिनाइयों के मार्ग से विजय के पथ की ओर|

निराशा के भंवर से आशा की नई किरण,
ना थकान,ना अविलम्ब ,
हर छन राष्टृ को समर्पित,
युवाओ क आदर्श ,
जीवन की सुगमता के लिए मार्ग प्रशसित |

कोटि कोटि प्रणाम प्रेणीय मानवीय कलाम|

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  1. gyanipandit 13/12/2015

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