“हाइकू”डॉ. मोबीन ख़ान

?हाइकू?

काले हैं मेघा
बरसी ढेरों बूदें
भीग गया बदन

चड़ती मस्ती
सरका है दुपट्टा
बदला है मौसम

गुनाह मेरा
गुनेहगार क्यों वो
भुग्ते ज़माना।।

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