बिगाड़ देती है………गजल-2

ज्यादा लाड बच्चों की आदत बिगाड़ देती है ।
दुषित हवा लोगों की सेहत बिगाड देती है ।।

जो जीवन में भटक जाते हैं इतने बुरे भी नही होते ।
अच्छे अच्छों को बुरी संगत बिगाड़ देती है ।।

सिर्फ चाँदनी रात मे ही तुम निकलना घर से बाहर ।
सूरज की तेज रोशनी रंगत बिगाड़ देती है ।।

उद्यान की कलियों खुद को बचाकर रखो तुम
भ्रमर को तो पुष्प की चाहत बिगाड़ देती है ।।

मुमकिन नही कि पैसे से किसी का पेट भर जाये
ज्यादा पाने की चाहत अकसर इज्जत बिगाड़ देती है

इंसा बनाकर भेजा था हमको खुदा ने दुनियाँ में
हिंदू – मुसलमाँ बनाकर हमें सियासत बिगाड़ देती है

और सुधरना चाहा जब भी वतन के नौजवानो ने
राज” उनहे हमारी बिगड़ी हुई विरासत बिगाड़ देती है ।

राज कुमार गुप्ता – “राज“

8 Comments

  1. Shishir "Madhukar" Shishir 11/12/2015
    • RAJ KUMAR GUPTA rajthepoet 11/12/2015
  2. Manjusha Manjusha 11/12/2015
    • RAJ KUMAR GUPTA rajthepoet 11/12/2015
  3. davendra87 davendra87 11/12/2015
    • RAJ KUMAR GUPTA Raj Kumar Gupta 12/12/2015
  4. asma khan asma khan 13/12/2015
    • RAJ KUMAR GUPTA Raj Kumar Gupta 13/12/2015

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