नई सुबह …….

नई सुबह , नया सूरज , नया समंदर ,नया आसमान ;
ये सदियों पुराने है ,पर फिर भी नए थे –
क्योंकि इनके साए में पंख लगाए ,
दो नाजुक से दिल और मोहब्बत का अरमान |

सागर की लहरें , हवा के थपेड़े ,
उड़ते हुए बादल और बारिश की बूंदे ;

कदम से कदम और हाथों में हाथ ,
चंचल सी चितवन , मुस्कराहट के साथ |

बहुत कुछ था बदला उस एक पल में ,
जिंदगी का आईना था उस सागर के जल में ;

देखे जो ख्वाब सालो-साल , दर-बदर ,
थी मेरे आगोश में सिमटी वो बेखबर |

लगन लगी अब जिंदगी से फिर ,
नजर आ गयी मंजिल ओ मुसाफिर ;

तेरी साँसों की गर्मी ,मेरे कलेजे की ठंडक ,
तेरी हँसी की रौनक , मेरी ख़ुशी का मंजर |

कुछ दूर चले थे हम ,समन्दर की गोद में ,
वो चंद कदम आखरी हो गये –
हमसफ़र की खोज में ,
हमसफ़र की खोज में …………

2 Comments

  1. Shishir "Madhukar" Shishir "Madhukar" 11/12/2015
  2. डी. के. निवातिया निवातियाँ डी. के. 11/12/2015

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