जाने क्या हो गया ज़माने को

जाने क्या हो गया ज़माने को
दौलत के पीछे भागते है।
खुद के दुःख से दुखी नहीं
दूसरे के के आग लगाते है।
खुद न गए मंदिर कभी
असहिष्णुता की बाते करते है
चोर अछुत और जाने न क्या
भूखे को देख कर कहते है।
जाने क्या हो गया ज़माने को
दौलत के पीछे भागते है।

5 Comments

  1. डी. के. निवातिया निवातियाँ डी. के. 11/12/2015
  2. asma khan asma khan 13/12/2015
  3. कृष्ण सैनी कृष्ण सैनी 14/12/2015
  4. Bihari Lal Gujar 06/08/2016
  5. कृष्ण सैनी कृष्ण सैनी 30/12/2016

Leave a Reply