बैस नई, अनुराग मई

बैस नई, अनुराग मई, सु भई फिरै फागुन की मतवारी ।
कौंवरे हाथ रचैं मिंहदी, डफ नीकैं बजाय रहैं हियरा रीन ॥
साँवरे भौंर के भाय भरी, ’घनाआनँद’ सोनि में दीसत न्यारी ।
कान्ह है पोषत प्रान-पियें, मुख अंबुज च्वै मकरंद सी गारी ॥

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  1. kanvara Ram delu, Barmer Raj. 08/07/2016

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