आज अपने आप से रूठ गए

सागर ने मुख मोड़ा तो नदी झरने से रूठ गए
दिल आज दिलदार से रूठ गए
हमें सिकवा जमाने किया
आज अपने आप से रूठ गए…
दिल की धड़कन माना था जिसे
हर बेचैनी की राहत माना था जिसे
आज वह दोस्ती हमसे छुट गए
यार-यार से रूठ गए
आज अपने आप से रूठ गए…
साथी छुटी राहे रुठी
आज अकेले-अकेले से हो गए
आज जाना दुनिया को
दुनिया भी छुटी जग भी रूठे
चार दीन की हैं जिन्दगी
यही आस लेकर जी रहे
आज दीन भी हमसे रूठ गए
आज अपने आप से रूठ गए…
खुशियाँ थी जब मेरे चेहरे पे
खुशियाँ भी आज गम हो गए
नम हो गई जब ये आँखे
जब दिल के रिस्ते तोड़ गए
देखी थी जो हमने सपना
सपना वो भी आज टुट गए
आज अपने आप से रूठ गए…
जीने की जब चाह थी
जिन्दगी हमसे रूठ गए
मौत को जब गले लगाने की सोची
मौत ने भी मुह मोड़ लिए
जीके अब मैं किया करू
जिन्दगी ने ही जब सारे नाते तोड़ लिए
आज अपने आप से रूठ गए…!!

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