काव्य एक जीवन

शब्दों ने रचा विचित्र एक खेल
खामोशियों में खो जाने का
गहराइयों में सो जाने का
है अजब सा यहां मेल
कविता एक संसार
सोच बनी अंगार
सत्य अदभुत
दोस्ती का
ये प्यार
गिनते रहे
उँगलियों पर
रिश्तों का लेखा
कश्मकश में धोखा
पर यह दुनिया निराली
सज रही पल पल दिवाली
जग में खालीपन के बिखराव
सुगंधो में निखरें यहां मेरे अभाव
सुरभित जीवन रचे मधुरित भाव।

…………… कमल जोशी

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