प्याली जिंदगी

दो पात्र की प्याली जिंदगी
खुल के जीयो तो खास है
शब्द तो जीवा पर कई हैं
पर रचने में क्या लाज है
मुख को आपने मौन किए हो
और जिंदगी एक रेत कली है
हाथ से फिसलेगी ऐसे
जैसे जिंदगी कं लगती है

दो पात्र की प्याली जिंदगी
खुल के जीयो तो खास है

एक ही जिंदगी, एक ही प्याली
एक बार ही जीना है
मत सोचो क्य होगा आगे
जो बोले दिल सो करना है

क्या लाज है, क्या डर है
जिंदगी तो ये छोटी सी
जब समय हो चलेगा आंगे
फिर पछ्तओ घरि घरि

दो पात्र की प्याली जिंदगी
खुल के जीयो तो खास है

लेखक : रोशन कुमार झा ( Mr.How )

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