* यह देश *

यह देश नहीं आतताइयों का
न सम्राज्यवादी न कसाईयो का
बन्धुता है जिसका नारा
गिरते को जो दे सहारा
यह देश !

यह देश है साधु सन्यासियों का
ऋषि मुनि और वनवासियों का
राजा भी जहाँ फकिड बन जाए
वैभव को जो दे ठुकड़ाए
यह देश !

यह देश जहाँ का राजा और प्रजा
पिता-पुत्र के सामान
धर्म है जिसके कण-कण में
मानवता जिसके नस-नस में विराजमान
यह देश !

यह देश है विश्व का अधिष्ठाता
प्राचीनतम है जिसकी सभ्यता
सभी भाषा और धर्मो का
जड़ है जिस में पाया जाता
यह देश !

यह देश है बाग-बगीचों का
झाड़नो के गीतों का
सुन्दर पंक्षी जीवो और संगीतो का
विभिधता में एकता और रितो का
यह देश !

यह देश जहाँ प्राकृति भी है मेहरबान
तीन मौसम और छः ऋतू
जिसे वह करती प्रदान
इसकी सुंदरता का क्या करे बखान
यह देश !

यह देश जिसकी हिमालय है मुकुट
चरण पखारता है महासागर
बाजु जिसकी फैली चारो दिशा में
बहुमूल्य सम्पदा जो रखी है दबा कर
यह देश !

यह देश ,इसका क्या हम गुणगान करे
इसका हम क्या बखान करे
गागर में है यह सागर
विभिन्न नाम है इसके यहाँ पर
यह देश !

यह देश है भारत , भरत भूमि
इसकी सुदृढ़ता सहनशीलता धीरता
का हम सम्मान करें
इसके ऊपर हम पूर्ण निक्षावर
आवो इसे सत-सत नमन प्रणाम करें।

यह देश ! यह देश !! यह देश !!!

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