* जवान *

जन-जन का हो जिस पे अभिमान
जो रहे सीमा पर सीना तान
जो अपने कर्म से हटा नहीं
दुर्गम परिस्थिति में डटा वही
जिस से देश की आन बान शान
वह कहलाता है जवान।

पीछे मूड जिसने देखा नहीं
झूठ फडेब का जिसके हाथो में रेखा नहीं
सीना हो जिसका चौड़ा
ललाट चमके ऐसे जैसे सूर्य-चाँद
कन्धा हो जिसकी उठी भव तनी जैसे कमान
वह कहलाता है जवान।

जो काम करता और खुश रहता
कभी नहीं जो कुछ कहता
घर-परिवार से जो दूर रहता
सब लूटा कर जो बने महान
जिसकी जीवनी साधु-संतो के सामान
वह कहलाता है जवान।

ऐसा नहीं की उसे भान नहीं
अच्छे बड़े की पहचान नहीं
जीवन की उतार-चढ़ाव का उसे ज्ञान नहीं
फिर भी वह बना रहे अनजान
ले ऋषि-मुनियों का ज्ञान
वह कहलाता है जवान।
वह कहलाता है जवान।।

2 Comments

  1. डी. के. निवातिया निवातियाँ डी. के. 08/12/2015
  2. नरेन्द्र कुमार नरेन्द्र कुमार 08/12/2015

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