नादाँ …..

मै रहू धीर गंभीर उन्हें कतई नही भाता
करू गर दिल्लगी वो भी रास नही आता !
किस तरह पेश आये जनाबे खिदमत में
अपना दिल -ऐ- नादाँ समझ नही पाता !!
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::—– डी. के. निवातियाँ ——::

4 Comments

  1. Shishir "Madhukar" Shishir 07/12/2015
    • डी. के. निवातिया निवातियाँ डी. के. 08/12/2015
  2. asma khan asma khan 07/12/2015
    • डी. के. निवातिया निवातियाँ डी. के. 08/12/2015

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