==* इंसानियत *==

लोग कहते है
लोग कहते है नर्क बुरा है
वहा दर्द का जलजला है
मै कहता हु
मै कहता हु नर्क क्या है
यहा जिंदगी बुरी बला है

रोज नये तमाशे
रोज नये तमाशे इंसानके
झगडे देखलो घर घरके
इंसानही काटता
इंसानही काटता इंसानको
जिंदगी सायेमे खौफके

हर कदम दगा
हर कदम दगा देती संगत
यकीन करे भी तो किसका
अपनेही छोडते है
अपनेही छोडते है दर्द मे साथ
ये तो नही संस्कार संसारका

देखा न कभी
देखा न कभी नर्क किसीने
है ऐतराज वहा सबको जानेमे
इंसानको कहा
इंसानको कहा लगता है डर
आज कल इंसानियत भूलानेमे

इंसानियत भूलानेमे

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शशिकांत शांडीले (SD), नागपूर
भ्रमणध्वनी – ९९७५९९५४५०
दि.०७/१२/२०१५

3 Comments

  1. gyanipandit 07/12/2015
  2. डी. के. निवातिया निवातियाँ डी. के. 07/12/2015
  3. शशिकांत शांडिले SD 07/12/2015

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