==* मुकम्मल जहां *==

कुछ वक्त के लपेटो मे लिपटे
कुछ लम्हो का सन्नाटा था
उम्रभर ख्वाहीशो मे ही सिमटे
कुछ किस्मत का तकाजा था

करते थे आरजू मिले हसीन पल
किसी पल का सहारा न था
हसरत तो थी आसमान छुनेकी
वो भी आसमान धुंदलासा था

है उम्मिदे अबभी जागी जागी
हर वो सपना अधुरासा था
यकिनन मुकम्मल होता जहां
पर मुकम्मल जमाना न था

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शशिकांत शांडीले (SD), नागपूर
भ्रमणध्वनी – ९९७५९९५४५०
दि. ०५/१२/२०१५

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