पाँच साल की छोटी लड़की

पाँच साल की छोटी लड़की
जब रस्ते पर होती है
इस दुनियाँ की धूम-धाम में
मन ही मन वह रोती है।

मुसकाती चेहरो के पीछे
रस कडवे का पिती है
इस दुनियाँ की धूम-धाम में
मन ही मन वह रोती है।

आते जाते लोगों से वह
जब दो पैसा पाती है
तब मन में उल्लास जगाती
फिर एक पल में रोती है।

मेरे ही आँखों के आगे, वह
दर-दर मारी फिरती है
न जाने क्या बात हो गई
जो वह मन में रोती है।

पाँच साल की और एक लड़की
जब उसके सामने होती है
मन में ही वह कहती है, कि
कितनी खुश वह रहती है।

वह जो कहती उसे मिलता है
और हम सारे दिन रोते है
अच्छे-अच्छे कपड़ो में
कितनी सुंदर वह दिखती है।

न जाने क्या भूल हो गई
जो हम ऐसे रहते है
फटे पुराने कपड़ो में ही
सारा दुख हम सहते है।

पर दुनियाँ कि रीति देखो
एक हँसती, एक रोती है
पाँच साल कि छोटी लड़की
जब रस्ते पर होती है
इस दुनियाँ की धूम-धाम में
मन ही मन वह रोती है।
-संदीप कुमार सिंह

4 Comments

  1. डी. के. निवातिया निवातियाँ डी. के. 07/12/2015
  2. संदीप कुमार सिंह संदीप कुमार सिंह 07/12/2015
  3. Rinki Raut Rinki Raut 08/12/2015
    • संदीप कुमार सिंह संदीप कुमार सिंह 13/12/2015

Leave a Reply