“इंसाफ़”डॉ. मोबीन ख़ान

क़ानून तो सिर्फ़ है, मोहताज़ लोगों के लिए।
गुनेहगारों को बचाने के लिए सिफारिशें हो जाती हैं।।

लाख कोशिशों के बाद भी ज़ुर्म ख़त्म होता नहीं।
इस जहाँन में आये दिन लाखों खताएं हो ज़ाती हैं।।

अब कैसे कोई मज़लूम इंसाफ की उम्मीद रखे।
ज़ब बे-गुनेहगारों को बे-वज़ह सज़ाएं हो जाती हैं।।

7 Comments

  1. संदीप कुमार सिंह संदीप कुमार सिंह 07/12/2015
    • Dr. Mobeen Khan Dr. Mobeen Khan 07/12/2015
  2. डी. के. निवातिया निवातियाँ डी. के. 07/12/2015
    • Dr. Mobeen Khan Dr. Mobeen Khan 07/12/2015
  3. RAJ KUMAR GUPTA rajthepoet 07/12/2015
    • Dr. Mobeen Khan Dr. Mobeen Khan 07/12/2015
  4. Rinki Raut Rinki Raut 08/12/2015

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