परीक्षा सी है तूं…. (रै कबीर)

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तूझे मिटा नहीं सकता
उभरे अक्षरों सी है तूं
सच्ची है मोहब्बत की लिखावट मेरी
उस पर पक्की स्याही है तूं
शब्द मात्र मजबूर कर दे
ऐसी कविता का भंडार है तूं
लिख लिया!
पढ लिया!
और सीख लिया!
तेरा सार भी कर लिया!!!
अब आखिरी वर्ष की परीक्षा है तूं…..

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