शादी में हाथी (रै कबीर)

ढोलक की थाप
नाचे साथी ।।
दोस्त की शादी
माँगे हाथी ।।
हमारे ही बस चर्चे हों
दिल खोल के सब खर्चे हों ।।
दूल्हे ने एक इच्छा जताई
जिसको सुन हमें चिंता सताई ।।
शाही सब बाराती हो
साथ में इक हाथी हो ।।
जिसपे बैढ लगें शानदार
पीछे हो ऊंटों की कतार ।।
भटके हम दर दर कुछ दिन
लौट के आए हाथी के बिन ।।
बोले साथी नहीं है हाथी
छोडो ये जिद
जान है जाती ।।
हाथी !हाथी !हाथी !हाथी!
हाथी तो हर हाल में होगा
गर न लाए साथी तुम हाथी
न होगी किसी हाल में शादी ।।
भारत दर्शन कर लिया सारा
फिर से भटका मारा मारा ।।
यहाँ पडे है पैर में छाले
छोडो हाथी पडे ऊंट के लाले ।।
यहाँ कहीं पे ऊंट मिलेंगे?
पानी के दो घूंट मिलेंगे? ।।
साब दोस्त मेरे की शादी
यहाँ कहीं पे मिलेगा हाथी?
फिर हमने एक जुगत भिडाई
पूरी करेंगे हम फरमाईश ।।
दूर गांव मिला एक हाथी
होके रहेगी दोस्त की शादी ।।
हमने दोस्त को फोन लगाया
आएगा हाथी भरोसा दिलाया ।।
तुम करो शादी की तैयारी
हाथी की मेरी जिम्मेदारी ।।
बचानी तो है दोस्त की साख
पर दाम लगेगा पूरे एक लाख ।।
लेकर हाथी निकल पडे हम
चल चलके पैदल निकला है दम ।।
उधर दोस्त तैयार हो गये
पूछा हमसे कहाँ रह गए ।।
हम यहाँ पर दूल्हा बन चुके
गाडी बाराती सज धज चुके ।।
रस्ते में ही हूं मेरे साथी
आराम फरमा रहा ये हाथी ।।
देर हो रही है मेरे भाई
बारात रावानगी की बारी आई ।।
हमने कहा उठ बै हाथी
भाई की तूने बेइज्जती करादी ।।
क्या फायदा हुआ तुझे लाकर
खाली करदी जेब खा खाकर ।।
पडा लाख में बची ना कोडी
तेरे चक्कर में रह गए बिन घोडी।।।।

4 Comments

  1. Shishir "Madhukar" Shishir "Madhukar" 07/12/2015
    • रै कबीर रै कबीर 07/12/2015
  2. डी. के. निवातिया निवातियाँ डी. के. 07/12/2015
  3. रै कबीर रै कबीर 07/12/2015

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