नजरिया

हर पायदान वक़्त का एक सा नहीं होता ,
कही जीत का जश्न है , कही आँखों में रुदाली ||

समंदर पे चमकती धूप, किनारे रेत है खाली!
कही भूख कम पड़ती है , कही अगरचे पेट है खाली!

तू क्यों रूठ कर बैठा है दुनिया बनाने वाले!
कहीं है बाढ़ का पानी, कहीं सूखे खेत हैं खाली!

ये तो तुझपे है तेरी आँखे क्या देखती है ,
कही उजला सवेरा है , कही लम्बी रात है काली ||

मुश्किलो मै न खो दू अपने आप को मै ,
कही है लड़ने का जज़्बा , कही उसके दर पे है सवाली ||

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