बेटी

कहती है – माँ लिख तू मुझ पे कविता
क्या लिखू ,कैसे लिखू , तू ही तो है प्रेरणा मेरी।
हसती है ,झूमती है,खुशियों से चहकती है
कैसे कहु, कैसे बोलू , तू ही तो है बचपन की कहानी मेरी।
लगती है गले , कभी रूठ बैठती
कैसे समझाऊ ,तुम रूठ जाती तो सांसे भी रूठ जाएगी मेरी।
– काजल /अर्चना

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  1. डी. के. निवातिया निवातियाँ डी. के. 05/12/2015

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