मेरी ईक्षा

दुनिया के फूल
नाम हो तेरे
रहो का काँटा
सामने बिछ जाए मेरे
फूलों कि दुनिया में
तेरा आगमन हो
सुरज को विदा कर
चाँद के साथ
अपनी शाम की चाय हो

तूभी मुस्कुराते खिल उठे
फुलो को चूमते
अपनी खुशी का इज़हार करें
दुनिया की सारी दुआओं को
एक एक माँगकर
फूलो के सामने बह रहे झरनों को तुझे को
तुझे प्रदान करूँ
जब कभी तूं झरने को देखे
मेरी याद में हर बार
एक आँसू कि बूँद देकर
झरना को एक बूँद बढा दे

फूलों की रंग बिरंगी ख़ुशबू
तेरे मकान जैसे महल में घुसकर
तेरे होटो के ऊपर
नाको को छूकर
अपनी ख़ुशबू छोड़ते गुजरे
दुआओं के भंडार में मेरी एक ये दुवा
कैद हो
पहल तुझे लग जाए

लेखक : रोशन झा ( ROsHaN jHA )

2 Comments

  1. Alok Upadhyay Alok Upadhyay 05/12/2015
  2. Alok Upadhyay Alok Upadhyay 05/12/2015

Leave a Reply