त्रिवेणी-1

कूलर की मशनूई हवा ही पीकर अब तक ज़िंदा हूँ,
वरना ग्लोबल-वार्मिंग से मैं कब का मर जाता।

देखो साईंस ने कितनी तरक्की कर ली है॥

(C)परवेज़ ‘ईश्क़ी’

Leave a Reply