बेचैन दिल

न जागा हुआ हु न सोया हुआ हु,
मैं तो किसी की यादों में खोया हुआ हु।
दिल बारबार ये कहता है क्यूँ ?
आख़ीर तू सहता है, जाके कह दे तु नहीं है भगवान !
दिल पे चोट लगे तो सहना नहीं है आसान,
यह वह घाव है जो मिटायें नहीं मीटता।
अदृश्य सा लगे सबको पर ज़ख़्म अदंर ही रहता,
क्यूँ न तू इतना ही रहम करदे , इस ज़ख़्म को खुद ही आके भर दे!
तब सायद इस दिल को चैन मीलें , मै कुछ देर तो सो पाऊँ ,
तेरे छुने से सायद मैं कूछ और दीन जी जाऊँ ।

2 Comments

  1. hemant mohan 30/12/2015
  2. सम्पा 30/12/2015

Leave a Reply