गुज़ारिश…!!

गुज़ारिश है
हाँ , तुमसे गुज़ारिश है ,
कि तुम यूं पास न आया करो
कि तुम जब पास होती हो
बहुत ही दूर लगती हो ,
मुझे मिलती हो तुम खुलकर
फ़क़त जब दूर होती हो ,
मेरी आँखों के हलकों में
समाती ही नहीं हो तुम ,
मगर जब ख़्वाब बनती हो
ख़्यालों में संवरती हो ,
यही पाता हूँ मैं अक्सर
कि इन सारे लम्हों में ,
तुम्हें महसूस करता हूँ
कि जैसे धड़कनों को साँस आए ,

गुज़ारिश है ,
कि तुम यूं दूर रहकर भी
रहो मौजूद मेरी रूह में हरपल !!

(C)परवेज़ ‘ईश्क़ी’

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