शौचालय का महत्व (स्वच्छ भारत मिशन)

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स्वच्छ भारत मिशन
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मेरा बचपन भी यु टहलाया था
मै भी खुले में शोच जाने का आदी था
शोचालय क्या होता है ना जाना ना समझा था
शोचालय भी थी पहली , इसकाे ना सुलझा पाया था
दुर दराज शोच करने भी जाना था
कभी कभी तो तबियत भी इतराती थी
दादा को संग रात्री में भी जाना था कभी कभी तो आकर भी नहाना था
मोहल्ले के हम साथी का चिडाना होता था
मै भी लज्जा से आँखे चुराता था
कभी शाला जाना में भी देरी हो जाती कभी गुरू जी की डाट भी लग जाती
जब से शोचालय को जाना इसके महत्व को समझा
तो सुर बदल गये विचार बदल गये
मेरी आदतों कें भी कुछ पहरेदार बदल गये ! छोटे बडें सारे उत्पात बदल गयें
जब शोचालय की गरिमा को समझा था
शायद मै उसका मोल भी ना कर पाया
उसे किस तराजु में तोल करू शायद
रब ने भी एेसा तराजु ना बनाया
अब समय कि चाल भी बदलनें लगी
मै भी शाला छोड कोलेज आया
अब शोचालय था हमसाथी
कोलेज जाने में कभी ना होती देरी
अब तबियत भी इतरायें
ना दादा संग जाना ना आके नहाना था
ना हम साथी को चिडाने का बहाना था
अब तो जब चाहा शोचालय ही जाना था
अब मेरे दादा भी उम्र की दहलिज पार कर गये !
पहले से कुछ ज्यादा कमजोर हो गये
पहले शोचालय का उपयोग नही करतें थें
अब मेरे दादा भी शोचालय का महत्व भी समझ गयें
अब मेरे दादा भी शोचालय का महत्व समझ गयें

!! जय िहन्द !!
जन जन का एक.ही नारा !
स्वच्छता अधिकार हमारा !!
बहु बेटीयो का एक ही सपना !
घर मे शौचालय हो अपना !!

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