“ख़ुदग़र्ज़”डॉ.एम. ख़ान

ना जाने क्यू इतना ख़ुदग़र्ज़ है ज़माना।
ख़ून के रिश्तों में भी मतलब है तलाश करता।।

अग़र इसे चाहत नहीं होती दोनों जहांन की।
तो ये कभी भी ख़ुदा की इबादत नहीं करता।।

4 Comments

  1. Swetarchi 04/12/2015
    • Dr. Mobeen Khan Dr. Mobeen Khan 04/12/2015
  2. asma khan asma khan 04/12/2015
    • Dr. Mobeen Khan Dr. Mobeen Khan 04/12/2015

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