मंजिल

देख कर सुनसान डगर अय पथिक मत रुक जाना
है मंजिल यही कहीं पर यह सोच कर चलते जाना

माना पथ में आएँगी बाधाये लाख पर मत घबराना ,
व्याकुल विचलित मन हो तो थोडा छाया तले सुस्ताना।।

मानाआग बरसायेगा अम्बर। और धरा उगलेगी ज्वाला ,
होसला बुलन्द कर पथिक तुझे होगा चलते चले जाना।।

राह में बिखरा पड़ा हो सोना होश नही तुम हरगिज़ खोना,
ऐ पथिक केवल यही लक्ष्य तुझे है चलते चले जाना ।।

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