मुक्तक

बरसते आसमा को भी कभी जलते हुए देखा
हरे हर पौध को भी धूप में पलते हुए देखा
यहाँ जो शख़्स अक्सर खुद को पत्थर दिल समझते हैं
उसी के आँख से मोती अभी गिरते हुए देखा

4 Comments

  1. davendra87 davendra87 02/12/2015
    • नितिश कुमार यादव नितिश कुमार यादव 02/12/2015
  2. asma khan asma khan 03/12/2015
    • नितिश कुमार यादव नितिश कुमार यादव 03/12/2015

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